Kangana रनौत का बयान | Congress की कार्यशैली | गांधीवाद तथा भाजपा का युग
| गांधीवाद |
मैं जितना समझता हूं आज का समय भारतीय राजनीति से समाज में एक ज्वलंत मानसिकता को लाया है। यह दूरगामी परिणामों पर नहीं सोचता। यह ऐसी मानसिकता है, कि चोर को अपने घर में चोरी होने से पहले ही मार आया हूं, इतना ज्वलंत। मैं तो पाता हूं, कि भाजपा को लेकर जो लोगों में एक मानसिकता है, वह उसके तेज धारदार होना, स्पष्ट और साफ किसी मत पर एकतरफा स्ट्रेट फॉरवर्ड होना है। हिंदुत्व, पाकिस्तान कुछ प्रमुख विषय हैं, जिन पर हम आज भाजपा को साफ देखते हैं। परिणाम में राम मंदिर, धारा 370 और एयर स्ट्राइक जैसे महत्वपूर्ण घटनाएं हमने देखी हैं। इनसे पहले अटल जी तो पाकिस्तान, हिंदुत्व पर इतने तो जोश में एकतरफा कभी नहीं रहे।
वहीं कांग्रेस को जाने तो वह ठीक विपरीत किसी भी तकरार के विषय पर बीच की राह निकालने वाली और यही कांग्रेस का राम मंदिर को लेकर रवैया रहा। कांग्रेस ने तकरार और विवादित मामलों को जिन पर उन्हें लगा कि राष्ट्र टुकड़ों में सा बंट सकता है, वह मामले लंबित लटके रहे, और इतने विलंबित की यूं जैसे वे लंबित मामले कांग्रेस के सैद्धांतिक आदर्श लगने लगे हों।
इसके कई कारण जान पड़ते हैं, कि कांग्रेस का शासन सिद्धांत ऐसा क्यों है। कांग्रेस के कार्य में किसी विषय पर विवाद होता तो दोनों पक्षों को संतुष्ट करने का प्रयत्न होता। मैं किन विषयों पर बात कर रहा हूं जहां, इसी संतुष्ट करने के प्रयास में जम्मू कश्मीर भारत का भाग होकर भी जैसे दूर-दूर सा था वह कांग्रेस के काल में लंबित मामले की भांति ही था। जिस पर नजर ही नहीं डाली गई, या यूं कहे कि सब काम प्रगति पर था, उस मामले को वैसे ही छोड़े रखे रहने पर भी।
क्योंकि कांग्रेस ने अपनी सब को संतुष्ट करने वाली प्रवृत्ति के चलते तो बंटवारा देखा था, और यह इसलिए भी था, क्योंकि उसी कांग्रेस ने अंग्रेजों के दमन चक्र को अपने सामने विफल होते भी देखा था। उधर वे पाकिस्तान की आवाज उठाते मुसलमानों पर दमन प्रक्रिया अपनाते और इधर वह कृत्य वर्तमान में बंटवारे से पाकिस्तान न बनने पर भारत के उन सब मुसलमानों के लिए कभी न मिटने वाला इतिहास बन जाता। जो समय-समय पर जागृत होता, और आज तक भारत में मुसलमानों को स्थाई होने ही नहीं देता। उनमें वह उद्गार मुख हमेशा लेता और वह पाकिस्तान की मांग में बोलते भी और कर गुजरते।
यह शायद यह ऐसा ही होता जैसे भारतवासी अंग्रेजी हुकूमत, उसके प्रशासन से लड़ते-भिड़ते रहे तब तक जब तक वे पा ना लिए।
अब देश के सेकुलर रहने का सवाल है, जब पाकिस्तान बन गया तो भारत क्यों सर्कुलर देश बना रहा, इस पर भी कई सकारात्मक और “हमारे पूर्वज भी भारत के हित में ही थे” इस तथ्य को ठीक ठहराने वाले कारण हो सकते हैं। इसके लिए हमें अपनी भाजपाई समझ से थोड़ा इतर आकर सोचना चाहिए।
खैर यदि बात कांग्रेस के कार्यशैली की हो तो इसका एक और कारक गांधी जी का कांग्रेस पर प्रभाव भी माना जा सकता है। गांधी जी वे व्यक्ति जिन्होंने आजादी के लिए सारे देश की आवाम को लड़ाई में लाकर खड़ा कर दिया, और राह ऐसी कि हर कोई आजादी की लड़ाई का भागीदार बन सके।
हाल ही में कंगना रनौत की टिप्पणी भी पढी जो गांधी जी पर की गई है, अब मैं कहूं तो ऐसी टिप्पणी आमतौर पर आदमी दो स्थिति में कर सकता है, एक तब जब वह देश के लिए गांधी जी से कई अधिक कर चुका हो और दूसरा तब जब आदमी इतिहास विषय में अब तक छठवीं तक की इतिहास गहराई से पढ़ पाया हो और कुछ अपने ही साथी जो नेता हो गए उनके भाषणों में कुछ को छांट छांट कर सुनता हो।
हमें यह बात ध्यान में रखनी चाहिए, कि ट्विटर पर पोस्ट करने के लिए उंगलियों से की बोर्ड पर खेलती कंगना जिस एक बटन को दबाने से अपने उन अनुयायियों में पहुंच जाती हैं, जो उनकी फोटो के इंतजार में हैं, गांधीजी उस दौर में पूरी दुनिया में प्रसारित हुए जब पूरी दुनिया में चीजों को पहुंचाने के लिए किसी बटन का प्रयोग नहीं होता था, और मानव की दो टांगे ही बहुप्रचलित गाड़ी थी।
यूं तो गांधीजी के विषय में अनेकों लोगों ने नकारात्मक कहा है, एक तो गांधी जी का कार्य क्षेत्र ही इतना विस्तृत था। किंतु कंगना जी पर कहना मुझे जाने क्यों जरूरी लगा। एक तो मुझे वह बहुत खूबसूरत लगती है, जाने क्यों। फिर उनके मुंह से यह बात बिल्कुल नहीं सजती, जाने क्यों।
अब केवल यदि पैसे लेकर विज्ञापनों में छपने वाले लोग उस आदमी जिस की मृत्यु 1948 में हो चुकी हो, और इतिहास तथा अन्य कई महत्वपूर्ण किताबों की कवर पृष्ठ पर आज तक छपकर लाइमलाइट में रहने वाले को चैलेंज करें, तो कहां ठीक लगता है।
कंगना जैसे इतनी बड़ी प्रसिद्धि पाना इतना आसान नहीं लेकिन वह अपने क्षेत्र की बात करें, विवादित और सरल कुछ भी। अन्य क्षेत्र में विवादित बयान जिनके मायने ही नहीं है, इससे वे अपना ही स्तर गिराती हैं। और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे देश की समृद्धि की क्षति ही है।
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