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गरीब के प्याज | Hindi literature, Diwakar Godiyal

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  गरीबी अभिशाप है। जो इसे जीता है वही जानता है कि हर क्षण यह दुनिया उसे इसका आभास कराती है विशेष कर वह गरीबी जो हमेशा अमीरों के बीच दौड़ धूप करती हो उसे आभास होता है कि वह गरीब है उन सब के बीच सबसे बुरी स्थिति में है। गरीबों के बीच गरीबी अच्छी हो सकती हैं। एक गांव हो जहां सभी एक जैसे पत्थर के मकान हो तो सबके हो, कुछ पालतू जानवर हो तो सबके हो, और बाकी अपना परिवार। लेकिन यह बुद्धिमत्ता और बेहतर होने की होड़ न हो। सचमुच वह गांव गरीबों का जरूर होगा किंतु खुशहाल किसी अमीर से अमीर गांव से कई अधिक होगा।  कल घर से निकला तो कोई खास उद्देश्य तो था नहीं बस चलते रहना था। लेकिन मुझे रुकना पड़ा एक आदमी प्याज का ठेला लगाए हुए था। उसमें बहुत कम एक किनारे पर लहसुन थे बाकी प्याज थे, इतना भी नहीं की ठेला भरा हो‌। मैंने देखा एक जोड़ा अपनी स्कूटी पर ठेले के पास आकर रुका वह उतरा भी नहीं बैठे-बैठे ही पूछा प्याज के भाव उस ढेले वाले आदमी ने जो भाव बताया वह उन्हें समझ नहीं आया पत्नी ने कहा पति को "चलो"  स्कूटी की गति बढ़ता ही था पति की, ठेले वाले का एक और ऑफर आया कुछ कम लगाकर, पत्नी ने अपनी बात सा...

राहुल गांधी | असफलताओं का अंबार लिए शीर्ष पर खड़े!

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असफल राहुल गांधी : बहुत समय बाद किसी नेता पर लिख रहा हूं किंतु लिख भी रहा हूं राहुल गांधी पर। कोई साधारण नेता नहीं है भारतीय राजनीति में ऐसे नेता जो सत्ता में रहें या विपक्ष में किंतु रहेंगे सबसे ऊपर ही ऐसे कई नेताओं में गांधी परिवार के नेता अव्वल रहे हैं। राहुल गांधी का राजनीति में होना इसका एक बड़ा कारण उनका परिवार ही है। उनका जन्म ही उन्हें विशेष अधिकार देता है, कोई कितना इसकी आलोचना करे किंतु आजादी के बाद यह क्रम जारी रहा। गांधी परिवार को कोई रोक न सका समय-समय पर अड़चने आई किंतु अंतिम तौर से उन्हें लांघ लिया गया। हाल में भी स्थितियां वही है असफलताओं का अंबार लिए राहुल गांधी खड़े हैं और कांग्रेस का अक्षुण्ण समर्थक उन्हें सर्वोच्च नेता कहते नहीं थकता। किंतु वो यह विचार नहीं करता की राज परिवार में कभी-कभी कुछ राजकुमार राजनीति में उतने माहिर नहीं होते, इतिहास यही बताता है। ना ही वो यह विचार करता है कि यह लोकतंत्र है राज परिवार का दौर समाप्त हो चुका है। बात युवा और पढ़े-लिखे व्यक्ति होने की है तो देश में मेधावी पढ़े-लिखे युवा सिविल सर्विसेज की तैयारी पर ज्यादा ध्यान देते हैं। हो सकता था...

जसपाल राणा | वो जिसका निशाना अचूक था | Remembering A Legend

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Jaspal Rana बचपन से दो नाम तो जरूर सुने दोनों नाम खेल जगत से जुड़े हुए। अपने घर में ही जिनकी बात होती या हमें ही किसी कारनामे पर उनके नाम की उपमा दे दी जाती। वह दो नाम थे एक महेंद्र सिंह धोनी और दूसरा जसपाल राणा। यह नाम सुदूर पहाड़ों में हमारे गांव की तरह ही हर गांव के लोगों की याद में था। जिसका वे कभी ना कभी प्रयोग कर ही देते।  धोनी का नाम जानना क्रिकेट के एक बेहद लोकप्रिय खेल होने के कारण हो सकता है। लेकिन जसपाल राणा वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने सुदूर मेरे गांव तक शूटिंग के उस खेल को ही बेहद लोकप्रिय बना दिया। गांव गांव तक गढ़वाल में जसपाल राणा एक मेधावी खिलाड़ी और विश्व स्तर पर पहचान पाने वाले चुनिंदा लोगों में शामिल हुए। देश और राज्य को खेल से सपनों को साकार करने का सफल उदाहरण दिया, जसपाल राणा जी ने। आज वह दिया बुझ गया किंतु उसका आलोक शेष रहेगा। शेष रहेगा वह नाम जिसके साए में कई नाम और उठेंगे। जसपाल राणा जी का जन्म 28 जून 1976 को उत्तरकाशी शहर में हुआ था। इनके पिताजी नारायण सिंह राणा से ही इन्होने शूटिंग के गुर सीखे और इन्हीं रास्तों पर चलकर जसपाल राणा देश के सफलतम शूटिंग खिलाड़ी ...

US-IRAN War | अमेरिका दुनिया के खिलाफ जंग में

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पिछले दिनों इस्लामाबाद में हुई अमेरिका ईरान की शांति वार्ता असफल रही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेड इवेंट्स प्रतिनिधि मंडल के साथ बिना किसी निर्णय पर पहुंचे वापस लौट के इसमें कोई हैरानी की बात भी नहीं है जैसा कि जर्मनी कहता है जर्मनी की तरफ से एक बयान आया है कि उन्हें इस शांति समझौते से पूर्व से ही कोई बहुत बड़ी उम्मीद नहीं थी क्योंकि इसे लेकर तैयारी पूरी नहीं की गई थी साथ ही यह संघर्ष लंबा चल सकता है और इससे पूरी दुनिया को बड़ी समस्याओं से गुजरना पड़ सकता है  दुनिया किन संकटों के मुहाने पर है:  हार्मोन स्ट्रेट इस जंग का केंद्र बन गया है इस स्थान के नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान अब आमने-सामने है दुनिया के व्यापार को लेकर हार्मोन स्ट्रीट बहुत अहम स्थान है यह ऊर्जा और खाद्य सामग्री के व्यापार को लेकर और उसकी आपूर्ति को लेकर पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है यदि अमेरिका अपनी दी गई इस चेतावनी को जो कि आज से लागू हो गई है कि वह समुद्र में नाकाबंदी करेगा उसकी नौसेना वहां से गुजरने वाले तमाम जहाज की जांच करेगी दुनिया यूं ही इस युद्ध के बाद ऊर्जा संकट में फंस चुकी है खड़ी की देश से महत्...

KWMM junior high school paithani | संस्मरण लेख

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KWMM Junior High school Paithani  कलावती मेमोरियल मॉन्टेसरी जूनियर हाई स्कूल पैठाणी अपने 25 वर्ष की उपलब्धियों का उत्सव मना रहा है। एक समय था, कि विद्यालय तीन कक्षाओं में चलता था। आठवीं तक की कक्षाएं चलाई जाती थी। मुझे याद है, कि कक्षाओं के बाहर बरामदे में भी पढ़ाई करते थे। श्यामपट्ट केवल दीवारों पर नहीं बने थे। बल्कि लकड़ी के ब्लैक बोर्डों का भी प्रयोग होता था। जिन्हें एक जगह से दूसरी जगह पढ़ने के लिए जहां छात्र बैठे वहां ले जाए जा सके। और वह स्कूल की पुरानी बिल्डिंग किसे याद नहीं। उसके प्रवेश के लिए वह छोटी सी सीढ़ियां और फिर कक्षाएं। यदि कहें तो वह भवन परिवार के रहने के लिए ही बनाया गया था, स्कूल उसमें चलाई जा रही थी। लेकिन यह स्वीकार करना होगा, कि उन छोटी सी सीड़ियों से ही कई छात्रों ने शिक्षा के सफल सीढ़ियां चढ़ी। मुझे याद है, ऊपर प्रधानाचार्य ऑफिस होता था। वहां पर्याप्त जगह थी, यह ग्राउंड फ्लोर को लगाकर दूसरी मंजिल या आखिरी मंजिल पर था। वहीं से सीढ़ियां नीचे उतर कर दोनों तरफ दो कक्षाओं में खुलती थी, और वहीं से और नीचे उतरे तो फिर दोनों तरफ दो कक्षाएं और खुलती थी। उस ...

Narendra Modi जन्मदिन विशेष 2025 | संघर्ष ने बनाया नायक

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नरेंद्र मोदी युग को भारत में भारतीय जनता पार्टी का स्वर्णिम युग कहा जा सकता है। इनमें जो खास बातें हैं, इनका प्रभाव भारतीय जनता पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ता पर भी है। इसलिए भारतीय जनता पार्टी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संगठित और सशक्त बनी रही है। नेतृत्व की यह क्षमता ही नरेंद्र मोदी को बेहद खास बनाती है। तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेना एक गैर कांग्रेसी पार्टी के नेता का यह सब एक समय तक सपना ही है।। चाय बेच कर अपना जीवन यापन करने वाले नरेंद्र मोदी ने समाज सेवा का रास्ता अपनाया, घर को भी त्याग दिया। क्योंकि राजनीति में आए अब राजनीति के क्षेत्र ही ऐसा है, जहां समर्थकों के साथ-साथ विरोधियों की भी बड़ी संख्या मिलती है। लेकिन हर व्यक्ति की अपने जीवन की कुछ व्यक्तिगत उपलब्धियां होती हैं। जो हम सबको प्रेरित करती हैं, नरेंद्र मोदी के जीवन में भी ऐसी कई बातें हैं और भारतीय जनता पार्टी का देश में इस समय पर सबसे मजबूत पार्टी होने का सीधा और सर्वाधिक श्रेय नरेंद्र मोदी को जाता है। बचपन में चाय बेची यह एक ऐसा पक्ष है, जो उन्हें देश की बुनियादी जनमानस से जोड़ता है, जो गरीब है जो हर...

महेंद्र सिंह धोनी | भारतीय क्रिकेट का सितारा

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रेलवे प्लेटफार्म की बेंच पर बैठा युवा इंतजार कर रहा है। वह जीवन की सफलता के लिए प्रकाश चाहता है, जो उसकी राह प्रसस्त करे। वह असमंजस में है, कि वह अपनी रेलवे की नौकरी त्याग दे या नहीं। वहां परिवार बड़ी आश बांधे है, की पुत्र रेलवे में नौकरी पा गया है भविष्य सुरक्षित है। लेकिन महेंद्र इतने में संतुष्ट नहीं है, क्योंकि वह जीवन भर अब तक क्रिकेट के लिए समर्पित रहा है। वह एक श्रेष्ठ खिलाड़ी है। लेकिन योग बनते नहीं दिखे कि वह भारत के लिए खेले। यहां इस बेंच पर बैठा महेंद्र इसी के मध्य उलझा है, कि वह किस तरफ बढ़े। एक ओर तो वह रेलवे की नौकरी कर सकता है। वहीं दूसरी ओर क्रिकेट उसे बुला रहा है। वह आगे बढ़ना चाहता है। एक और उसके परिवार की आशाएं और खुशियां हैं, जो कहीं तो पूरी हो गई है, जबकि वह रेलवे में सरकारी नौकरी कर रहा है। लेकिन दूसरी ओर उसका मन स्थिर नहीं है। आती ट्रेन को देख वह स्पष्ट होता गया और भी अधिक कि उसे किस राह पर चलना है। रेलवे की नौकरी के बाद वह रोज खेलता तो है, लेकिन यह उसे कहीं लेकर नहीं जा रहा, वे खिलाड़ी जो रणजी में उसके साथ खेले उनमें कई आज भारतीय क्रिकेट के सितारे हो गए हैं। ट्र...

राठ क्षेत्र से मुख्यमंत्री आवास तक का सफर | राठ का तात्पर्य | विशेष लेख

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Uttrakhand Holi एक होली की टीम ने पहल की वे देहरादून जाएंगे अपने लोगों के पास और इस बार एक नई शुरुआत करेंगे। कुछ नए गीत उनके गीतों में खुद का भाव वही लय और पूरे खुदेड़ गीत बन गए। खूब मेहनत भी की और इस पहल को करने का साहस भी किया। देहरादून घाटी पहुंचे और पर्वतीय अंचलों में थाली बजाकर जो हम होली मनाया करते थे, उसे विशुद्ध कलाकारी का स्वरूप दिया। हालांकि आज से पहले बहुत से शानदार टोलियों ने होली बहुत सुंदर मनाई है।। बदलते समय के साथ संस्कृति के तमाम इन अंशो का बदला स्वरूप सामने आना जरूरी है, उसे बेहतर होते जाना भी जरूरी है। और यह तभी हो सकता है, जब वह प्रतिस्पर्धी स्वरूप में आए अर्थात एक दूसरे को देखकर अच्छा करने की इच्छा। इस सब में सबसे महत्वपूर्ण है, संस्कृति के इन छोटे-छोटे कार्यक्रमों का अर्थव्यवस्था से जुड़ना अर्थात इन कार्यक्रमों से आर्थिक लाभ होना, यदि यह हो पा रहा है, तो सब कुछ उन्नत होता चला जाएगा संस्कृति भी। उदाहरण के लिए पहाड़ों में खेत इसलिए छूट गए क्योंकि शहरों में नौकरी सरल हो गई और किफायती भी। कुल मिलाकर यदि पहाड़ों में खेती की अर्थव्यवस्था मजबूत होती तो पहाड़ की खेती कभी ...

लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी जी ने किसके खिलाफ मोर्चा खोला है?

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Narendra Singh Negi  श्रीनगर किताब कौथिक आयोजित ना होना या जो खबर है, कि उसे होने से रोका गया। इस घटना ने बहुत से सवालों को पैदा किया है, बात यह है कि श्रीनगर में किताब कौथिक आयोजित होना था। इस कौथिक को करवाने वाली उस टीम में सदस्य कहें, हेम पंत जी ने अपनी बात को रखा। वह कहते हैं, कि इस आयोजन को पॉलिटिकल दृष्टि से देखा जा रहा है। जबकि ऐसा कुछ है नहीं। हम पहाड़ों के दूरस्थ गांव में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहते हैं, उसे स्थापित करना चाहते हैं। हमारे राज्य के ऐतिहासिक, पौराणिक क्षेत्र का ज्ञान लोगों को करवाना चाहते हैं। यही हमारा उद्देश्य है 12 सफल आयोजन करवाने के बाद 13 वें आयोजन में इस प्रकार की रुकावट को वे खेदपूर्ण बताते हैं। दूसरी तरफ छात्र संघ है। छात्र संघ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि हमें इस बात की सूचना जब मिली की कॉलेज परिसर में किताब कौशिक का आयोजन होगा और इसमें कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किए जाएंगे। हमने लाइब्रेरी में जो तमाम छात्र पढ़ने आते हैं उनसे बात की तो उनकी सहमति पर क्योंकि उनकी परीक्षाएं चल रही हैं, जिसके चलते छात्र हित में हमने इस किताब कौथिक के...

2 Oct 1994 | रामपुर तिराहा कांड

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सन 2003 में लेखक निर्माता अनुज जोशी जी के निर्देशन में एक फिल्म “तेरी सौ” बनाई गई जो कि उत्तरांचल अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन पर आधारित है। फिल्म में सक्षम जुयाल और पूजा रावत मुख्य पात्र नाम क्रम से मानव और मानसी हैं। जो डीएवी कॉलेज देहरादून के छात्र होते हैं। मानव उत्तराखंड आंदोलन में सेलाकुई के शहीद 15 वर्षीय सत्येंद्र चौहान के चचेरे बड़े भाई की भूमिका में होते हैं।  डीएवी कॉलेज देहरादून तब छात्र एकता में उत्तराखंड आंदोलनकारियों का गढ़ हुआ करता था। डीएवी पीजी कॉलेज के छात्र दबंग माने जाते थे। हालांकि मानव और उसके साथियों का गांधीवादी विचार और शांतिपूर्ण ढंग से राज्य आंदोलन को आगे बढ़ाने वाला दिखाया गया है। मदन डुकलान जी के लिखे गीतों ने फिल्म को अधिक खूबसूरत बना दिया। फिल्म के गीत “मेरी जन्मभूमि मेरो पहाड़”,  “ले मशाले चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के अब अंधेरा जीत लेंगे लोग मेरी गांव के”,  “गढ़वाली अंताक्षरी”,  “तेरी सौं”, धार मा सी जून मुखड़ी च तेरी”,  “सौं उठोला कठ्ठा होला चला दिल्ली जोंला गढ कुमों द्वी हाथ बोटी हक अपड़ो ल्योला”,  “हक का बाना ह्वे गीं...

अमोल पालेकर | फिल्म अपने पराये से

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अमोल पालेकर सादगी और केवल सादगी असल में अमोल पालेकर ने यही तो पेश किया है। अपनी लगभग हर फिल्म एक आदर्श गुणी पुरुष की भांति ही दिखे हैं। इन्हें नेक्स्ट डुअर पर्सन कहा गया। क्योंकि इनकी आवाज और अभिनय ने हर दूसरे व्यक्ति को अपने आप से मिलाया। एक मृदंग को बजाते हुए अमोल जाने कब बड़े हो गए, यह वे खुद भी नहीं जान पाए। लेकिन वे इन सब बातों की सुध नहीं लेते। आज से 30 साल पहले एक अच्छे मध्यम वर्गीय परिवार में दो भाइयों के बाद उनका जन्म हुआ था, बहुत सुंदर मृदंग बजाते हैं अमोल। प्रातः होने के साथ उनकी ताल छिड़ जाती है। घर के सभी बच्चे दौड़कर चाचा की ओर बढ़ते हैं, और अमोल एक सुंदर भजन गाते हैं। उनकी भाभी पूजा करती हुई और साथ ही अमोल के भजन। यूं तो अमोल का विवाह भी हो गया है, और वह एक खुशमिजाज और बेफिक्र व्यक्ति हैं। लेकिन यहां बेफिक्री उसकी पत्नी के लिए असहज है। हालांकि वह बहुत समझदार और शील स्त्री है, घर की लगभग सभी जिम्मेदारियां उसी के हाथों में हैं। लेकिन साथ ही वह एक स्वाभिमानी स्त्री है, और केवल इस बात से चिंतित है, कि उसका पति अमोल किसी काम को गंभीरता से नहीं लेता। यही है कि वह कुछ भी कमा कर...

हजारों असफलताओं की सफलता | एडिसन

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थॉमस अल्वा एडिसन थॉमस अल्वा एडिसन एक बहुत ही चर्चित नाम। वे केवल वैज्ञानिक जगत में बड़े आविष्कारों के लिए नहीं जाने जाते, बल्कि उनका जीवन एक प्रेरक कहानी के तौर पर भी पेश किया जाता है। इसका श्रेय उनकी माता को भी जाता है, कि एडिसन एक बेहद जिज्ञासु और लग्नशील व्यक्तित्व को प्राप्त करते हैं। स्कूल के समय पर एडिसन बेहद एकांत प्रिय छात्र थे, साथ ही वह जिज्ञासु प्रकृति के थे, तो अपने गुरुजनों से बिल्कुल अटपटे सवाल करते। इन सब सवालों के जवाब तो दिए भी जा सकते थे, और शायद नहीं भी। लेकिन शिक्षकों द्वारा उनकी इस उत्सुकता को बढ़ावा न दिया जा सका। उनकी माता को विद्यालय बुलाया गया और एडिशन के शिक्षकों के साथ व्यवहार की शिकायत की गई। तब तक एडिशन छोटा बालक था। अगले कुछ ही दिनों में एडिशन एक पत्र के साथ घर लौटा, मां को वह पत्र लाकर सौंप दिया कि स्कूल से प्राप्त हुआ है, एडिशन तब तक पूरा पढ़ना भी नहीं जानते थे, तो मां से उस पत्र में लिखा हुआ जानना चाहते थे।   उस पत्र को पढ मां की आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने एडिसन को बताया कि इस पत्र में लिखा है, कि हमारे स्कूल में एडिसन एक बेहद बुद्धिमान छा...

संस्कृतियों का उदय | विशेष लेख

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दुनिया एक गति के साथ है। यह केवल धरती का घूमना सूरज के चारों ओर चक्कर लगाना मात्रा नहीं है, बल्कि धरती से बाहर उस ब्रह्मांड की गति, वहां हर कारण जो अपना चक्र पूरा कर रहा है। साथ ही धरती के भीतर हर प्राणी हर वस्तु और पदार्थ अपना समय बिता रहे हैं। यह सब एक चक्र में है और एक गति से प्रेरित हैं। यह पदार्थ प्राणियों के संबंध में है। क्या यह मानव सभ्यताओं और संस्कृतियों के लिए भी सत्य है, कि वह भी एक चक्र में है, और एक चक्र पूरा कर लेने के बाद उनका काल भी समाप्त हो जाएगा। हजारों साल पुरानी कोई सभ्यता यदि आज भी प्रासंगिक है, तो यह वह दूरदृष्टि है जो तब हजारों साल पहले आने वाले हजारों सालों के लिए स्थापित की गई, और लोग तब से आज तक उसका निष्ठावान अनुसरण करते हैं। दुनिया की गति के साथ या इस बीते समय के साथ स्थितियां और जीवन जीने के लिए साधन और विकल्प भी बदल रहे हैं। यह बात तो स्वीकार करनी होगी, की सभ्यताएं तभी पनपती हैं जब मानव अपने लिए मूलभूत आवश्यकता के संसाधन जुटा पा रहा हो। भूखे और प्यासे व्यक्ति के लिए अन्न जल का मिल जाना ही सबसे बड़ी बात है, हर भोजन की तलाश में भटकते संसार के किसी भी अ...

अब सचिन कहो या विराट! विशेष लेख

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विराट कोहली ने क्रिकेट के मैदान पर उपलब्धियों के सबसे ऊंचे पायदान को छू लिया है। जिन्होंने उस पायदान को स्थापित किया था, वह भी भारतीय और आज फिर उसे दोहराया है वह भी भारतीय। विराट कोहली ने अपने वनडे इंटरनेशनल करियर में 49वां शतक लगाया है। और यह सचिन तेंदुलकर के ही बराबर है। अब विराट कोहली इस कीर्तिमान को छू चुके हैं। तो वह सचिन तेंदुलकर के समकक्ष हो गए हैं, यह बात होनी स्वाभाविक है। यह तो है, कि आधुनिक दौर के क्रिकेट में विराट कोहली ने एक स्तर स्थापित किया है, जिसे महान कहा जा सकता है। वह कीर्तिमान जो बीते समय में सचिन तेंदुलकर द्वारा स्थापित किए गए हैं, वे भावी भविष्य के लिए केवल महान कीर्तिमान नहीं, केवल प्रेरणा नहीं बल्कि आज यदि कोई उस कीर्तिमान को छूता है, उससे आगे बढ़ता है तो यह हमारी उन्नति का प्रतीक है। यह हमारे बढ़ते रहने का प्रतीक है। इसलिए कहते हैं कि रिकॉर्ड बनाये ही जाते हैं तोड़ने के लिए। क्योंकि हम भविष्य को उन्नति की ओर बढ़ता हुआ चाहते हैं, और ऐसा ही होता है। लेकिन यह तो है, कि इस कीर्तिमान को हासिल कर लेने से विराट कोहली ग्रेट विराट कोहली कहे जाने के और योग्य हो गए हैं...

अब सर्वश्रेष्ठ विराट कोहली कहो।

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केवल खिलाड़ियों के साथ विराट कोहली मैदान पर नहीं खेल रहे हैं। वे वहीं से दर्शकों में मैदान की ऊर्जा भर रहे हैं। यह उनका एक अलग अंदाज दर्शाता है। और यही है जो विशाल संख्या में चाहने वालों को देता है। यही जो उन्हें सबसे अलग बनाता है। यह वह दौर है, जहां विराट कोहली अपने सर्वश्रेष्ठ पर हैं। किसी भी स्थिति में मजबूत और विश्वस्त। विराट आज अपने जन्मदिन पर सर सचिन तेंदुलकर के एक और विराट रिकॉर्ड को अपने नाम कर चुके हैं। वन डे इंटरनेशनल क्रिकेट में 49 बार सौ रनों की पारी। यह कैसा है, पहले तो आप अपने कठिन परिश्रम से भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनते हैं, जो अपने आप में एक महान सफलता है। लेकिन उसके बाद भी आप ठहर नहीं जाते, आप लगातार आगे बढ़ाने को उत्सुक हैं। आपमें प्यास है, और आप पूरी तरह से उसके लिए समर्पित हैं। आप लगातार नए प्रयोग करते हैं, और उनसे सीखते हैं। तब जाकर एक विराट “विराट कोहली” सामने आते हैं। जिन्हें देखकर ऐसा प्रतीत होता है, कि आज मैदान पर आए हैं तो जाने क्या रिकॉर्ड बनाने को। वह एक महान बल्लेबाज हैं, और इस बात को उन्होंने साबित किया है। क्रिकेट के इतिहास में महानता के उन आया...

बनास के धावक | अंकित कुमार राष्ट्रीय गोल्ड मेडलिस्ट

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  अंकित कुमार आजकल लोगों ने खूब सुना और देखा। देखते ही देखते पैठाणी घाटी का चर्चित चेहरा बन गया। हालांकि जो उन्होंने कर दिखाया है, वह इससे कई बड़ा है। गोवा में चल रहे राष्ट्रीय खेलों में पौड़ी गढ़वाल निवासी अंकित कुमार ने स्वर्ण पदक हासिल किया है। उन्होंने 10 किलोमीटर दौड़ को 29 मिनट और 51 सेकंड में पूरा कर यह पदक अपने नाम किया। बात यह है कि अंकित कुमार अपने निकटवर्ती गांव बनास के हैं और यह स्थानीय लोगों के लिए रेखांकित करने वाली बात है, हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं।   यदि स्थानीय बातचीत के संदर्भ में विचार पेश करें। मेरा इस लेख को लिखने का मुख्य कारण क्षेत्रीय विषयों को अहमियत देना और क्षेत्रीय उपलब्धियां को क्षेत्र के लोगों से अधिक से अधिक जोड़ने का प्रयास करने के साथ यह भी है की साथी युवाओं से मैंने कई बार सुना है “बनास के धावक” शायद आपने भी सुना हो। जो लोग इस बात को पूर्व से जानते हैं और स्वीकार करते हैं, वे अंकित कुमार की इस उपलब्धि के बाद सीधे इसी बात का स्मरण करेंगे “बनास के धावक” बनास गांव के युवा तेज दौड़ते हैं। यह उपलब्धि फौजी के लिए दौड़ लगाते युवाओं के बीच ...

दुनिया एक सफर में और जीवन चक्र | विशेष लेख

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जीने के लिए प्लायन एक अहम क्रिया है? आज से हजारों साल पहले मानव ने अफ्रीका से दुनिया भर में पलायन आरंभ किया। हर कोने को जानना और अपने लिए उपयुक्त स्थान की तलाश में सफर जारी है। आज भी यह जारी है, और सच तो यह है, कि यह सफर दुनिया में चल रहे हजारों प्राणी जातियों के सफर में एक है। वह सब सफर कर रहे हैं, अपने जीवन के लिए कोई अपने भोजन के लिए और कोई बदलते समय, मौसम और जलवायु के लिए। कुल मिलाकर दुनिया एक सफर में है। कोई धीमी चाल में और कोई तीव्र। कोई हर समय सफर में ही है, कोई मौसम के साथ सफर में है, कोई साल में एक बार तो कोई जीवन में एक बार सफर में है। यह सफर धरती पर बसे केवल प्राणी जगत के लिए नहीं है। यह सफर तो स्वयं इस धरती के लिए भी है, वह भी सफर में है। हमारी धरती सूरज का चक्कर लगा रही है, यह मौसम परिवर्तन का कारण है। धरती अपने अक्ष पर भी घूम रही है, और यह रात दिन के लिए कारण है। सूरज के सामने जो हिस्सा होगा वहां दिन होगा और यह 12 घंटे के समय के लिए है। धरती 23.5 डिग्री झुकी हुई भी है और यह ध्रुव पर एक महत्वपूर्ण घटना को जन्म देता है। छः माह दिन और छः माह रात, और यह यहां के जीवन को बह...