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Showing posts from June, 2026

गरीब के प्याज | Hindi literature, Diwakar Godiyal

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  गरीबी अभिशाप है। जो इसे जीता है वही जानता है कि हर क्षण यह दुनिया उसे इसका आभास कराती है विशेष कर वह गरीबी जो हमेशा अमीरों के बीच दौड़ धूप करती हो उसे आभास होता है कि वह गरीब है उन सब के बीच सबसे बुरी स्थिति में है। गरीबों के बीच गरीबी अच्छी हो सकती हैं। एक गांव हो जहां सभी एक जैसे पत्थर के मकान हो तो सबके हो, कुछ पालतू जानवर हो तो सबके हो, और बाकी अपना परिवार। लेकिन यह बुद्धिमत्ता और बेहतर होने की होड़ न हो। सचमुच वह गांव गरीबों का जरूर होगा किंतु खुशहाल किसी अमीर से अमीर गांव से कई अधिक होगा।  कल घर से निकला तो कोई खास उद्देश्य तो था नहीं बस चलते रहना था। लेकिन मुझे रुकना पड़ा एक आदमी प्याज का ठेला लगाए हुए था। उसमें बहुत कम एक किनारे पर लहसुन थे बाकी प्याज थे, इतना भी नहीं की ठेला भरा हो‌। मैंने देखा एक जोड़ा अपनी स्कूटी पर ठेले के पास आकर रुका वह उतरा भी नहीं बैठे-बैठे ही पूछा प्याज के भाव उस ढेले वाले आदमी ने जो भाव बताया वह उन्हें समझ नहीं आया पत्नी ने कहा पति को "चलो"  स्कूटी की गति बढ़ता ही था पति की, ठेले वाले का एक और ऑफर आया कुछ कम लगाकर, पत्नी ने अपनी बात सा...

एनडीए सरकार की बढ़ती ताकत | विपक्ष के कमजोर क्या प्यादे गिर रहे हैं!

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देश की राजनीति में इस समय पर जोड़-तोड़ का कार्य चल रहा है। एनडीए सरकार को संसद में अपना समर्थन बढ़ाना है। संख्या को कम से कम इतना लेकर जाना है, कि वह परिसीमन के विधेयक को महिला आरक्षण के विधेयक को पास करवा सकें। यह उनके लिए बहुत जरूरी है तृणमूल कांग्रेस को लेकर जो खबरें चल रही हैं समाजवादी पार्टी को लेकर और उद्धव ठाकरे के शिवसेना को लेकर जो खबरें हैं यह सब इसी गणित का हिस्सा है। उधर दक्षिण में डीएमके की असंतुष्ट स्थिति भी काम में लाई जा सकती है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी कितना समर्थन जुटा पाती है इसकी पूरी गणित को कुछ इस प्रकार से समझेंगे।  तृणमूल कांग्रेस की बिखरती शक्ति : हाल में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों में भी बगावत हो गई है। पहले तो विधानसभा में कई नेताओं ने बगावत कर दी पार्टी के हाई कमान की बात मानने से इनकार कर दिया। यह सब ममता बनर्जी के चुनाव हार जाने के बाद हुआ है, उससे पहले तक सब ठीक था टीएमसी की सरकार थी और एक बार फिर से सरकार बनने की आश थी तब तक सब ठीक था लेकिन जैसे ही चुनाव हार गई ममता बनर्जी सारा मामला बिगड़ गया, सारे नेता अपने-अपने रास्ते निकल पड़े। ऋतव्रत बनर्जी क...

राहुल गांधी | असफलताओं का अंबार लिए शीर्ष पर खड़े!

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असफल राहुल गांधी : बहुत समय बाद किसी नेता पर लिख रहा हूं किंतु लिख भी रहा हूं राहुल गांधी पर। कोई साधारण नेता नहीं है भारतीय राजनीति में ऐसे नेता जो सत्ता में रहें या विपक्ष में किंतु रहेंगे सबसे ऊपर ही ऐसे कई नेताओं में गांधी परिवार के नेता अव्वल रहे हैं। राहुल गांधी का राजनीति में होना इसका एक बड़ा कारण उनका परिवार ही है। उनका जन्म ही उन्हें विशेष अधिकार देता है, कोई कितना इसकी आलोचना करे किंतु आजादी के बाद यह क्रम जारी रहा। गांधी परिवार को कोई रोक न सका समय-समय पर अड़चने आई किंतु अंतिम तौर से उन्हें लांघ लिया गया। हाल में भी स्थितियां वही है असफलताओं का अंबार लिए राहुल गांधी खड़े हैं और कांग्रेस का अक्षुण्ण समर्थक उन्हें सर्वोच्च नेता कहते नहीं थकता। किंतु वो यह विचार नहीं करता की राज परिवार में कभी-कभी कुछ राजकुमार राजनीति में उतने माहिर नहीं होते, इतिहास यही बताता है। ना ही वो यह विचार करता है कि यह लोकतंत्र है राज परिवार का दौर समाप्त हो चुका है। बात युवा और पढ़े-लिखे व्यक्ति होने की है तो देश में मेधावी पढ़े-लिखे युवा सिविल सर्विसेज की तैयारी पर ज्यादा ध्यान देते हैं। हो सकता था...

जसपाल राणा | वो जिसका निशाना अचूक था | Remembering A Legend

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Jaspal Rana बचपन से दो नाम तो जरूर सुने दोनों नाम खेल जगत से जुड़े हुए। अपने घर में ही जिनकी बात होती या हमें ही किसी कारनामे पर उनके नाम की उपमा दे दी जाती। वह दो नाम थे एक महेंद्र सिंह धोनी और दूसरा जसपाल राणा। यह नाम सुदूर पहाड़ों में हमारे गांव की तरह ही हर गांव के लोगों की याद में था। जिसका वे कभी ना कभी प्रयोग कर ही देते।  धोनी का नाम जानना क्रिकेट के एक बेहद लोकप्रिय खेल होने के कारण हो सकता है। लेकिन जसपाल राणा वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने सुदूर मेरे गांव तक शूटिंग के उस खेल को ही बेहद लोकप्रिय बना दिया। गांव गांव तक गढ़वाल में जसपाल राणा एक मेधावी खिलाड़ी और विश्व स्तर पर पहचान पाने वाले चुनिंदा लोगों में शामिल हुए। देश और राज्य को खेल से सपनों को साकार करने का सफल उदाहरण दिया, जसपाल राणा जी ने। आज वह दिया बुझ गया किंतु उसका आलोक शेष रहेगा। शेष रहेगा वह नाम जिसके साए में कई नाम और उठेंगे। जसपाल राणा जी का जन्म 28 जून 1976 को उत्तरकाशी शहर में हुआ था। इनके पिताजी नारायण सिंह राणा से ही इन्होने शूटिंग के गुर सीखे और इन्हीं रास्तों पर चलकर जसपाल राणा देश के सफलतम शूटिंग खिलाड़ी ...