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एनडीए सरकार की बढ़ती ताकत | विपक्ष के कमजोर क्या प्यादे गिर रहे हैं!

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देश की राजनीति में इस समय पर जोड़-तोड़ का कार्य चल रहा है। एनडीए सरकार को संसद में अपना समर्थन बढ़ाना है। संख्या को कम से कम इतना लेकर जाना है, कि वह परिसीमन के विधेयक को महिला आरक्षण के विधेयक को पास करवा सकें। यह उनके लिए बहुत जरूरी है तृणमूल कांग्रेस को लेकर जो खबरें चल रही हैं समाजवादी पार्टी को लेकर और उद्धव ठाकरे के शिवसेना को लेकर जो खबरें हैं यह सब इसी गणित का हिस्सा है। उधर दक्षिण में डीएमके की असंतुष्ट स्थिति भी काम में लाई जा सकती है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी कितना समर्थन जुटा पाती है इसकी पूरी गणित को कुछ इस प्रकार से समझेंगे।  तृणमूल कांग्रेस की बिखरती शक्ति : हाल में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों में भी बगावत हो गई है। पहले तो विधानसभा में कई नेताओं ने बगावत कर दी पार्टी के हाई कमान की बात मानने से इनकार कर दिया। यह सब ममता बनर्जी के चुनाव हार जाने के बाद हुआ है, उससे पहले तक सब ठीक था टीएमसी की सरकार थी और एक बार फिर से सरकार बनने की आश थी तब तक सब ठीक था लेकिन जैसे ही चुनाव हार गई ममता बनर्जी सारा मामला बिगड़ गया, सारे नेता अपने-अपने रास्ते निकल पड़े। ऋतव्रत बनर्जी क...

राहुल गांधी | असफलताओं का अंबार लिए शीर्ष पर खड़े!

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असफल राहुल गांधी : बहुत समय बाद किसी नेता पर लिख रहा हूं किंतु लिख भी रहा हूं राहुल गांधी पर। कोई साधारण नेता नहीं है भारतीय राजनीति में ऐसे नेता जो सत्ता में रहें या विपक्ष में किंतु रहेंगे सबसे ऊपर ही ऐसे कई नेताओं में गांधी परिवार के नेता अव्वल रहे हैं। राहुल गांधी का राजनीति में होना इसका एक बड़ा कारण उनका परिवार ही है। उनका जन्म ही उन्हें विशेष अधिकार देता है, कोई कितना इसकी आलोचना करे किंतु आजादी के बाद यह क्रम जारी रहा। गांधी परिवार को कोई रोक न सका समय-समय पर अड़चने आई किंतु अंतिम तौर से उन्हें लांघ लिया गया। हाल में भी स्थितियां वही है असफलताओं का अंबार लिए राहुल गांधी खड़े हैं और कांग्रेस का अक्षुण्ण समर्थक उन्हें सर्वोच्च नेता कहते नहीं थकता। किंतु वो यह विचार नहीं करता की राज परिवार में कभी-कभी कुछ राजकुमार राजनीति में उतने माहिर नहीं होते, इतिहास यही बताता है। ना ही वो यह विचार करता है कि यह लोकतंत्र है राज परिवार का दौर समाप्त हो चुका है। बात युवा और पढ़े-लिखे व्यक्ति होने की है तो देश में मेधावी पढ़े-लिखे युवा सिविल सर्विसेज की तैयारी पर ज्यादा ध्यान देते हैं। हो सकता था...

पश्चिम बंगाल चुनाव के परिणाम | west bengal election results

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West Bengal election results  पश्चिम बंगाल में और अन्य चार राज्यों में असम, तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी में वोटो की गिनती शुरू हो चुकी है पश्चिम बंगाल में 293 सीटों पर गिनती शुरू हो चुकी है या आरंभ हो रही है एक सीट फालता में 21 में को फिर से चुनाव होगा कुल सीटों की संख्या 294 है और बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता है। बीजेपी और टीएमसी की तरफ से मजबूत दावे पेश किए गए हैं शुरुआती रुझानों में बीजेपी 100 सीटों पर आगे हैं और टीएमसी 92 सीटों पर आगे है। नरेंद्र मोदी ने पोस्ट कर लिखा है परिश्रम से हर चुनौती पार होगी।  शुरुआती रुझानों में भवानीपुर से ममता बनर्जी आगे चल रही हैं वहीं नंदीग्राम से सुरेंद्र अधिकारी ने बढत बना रखी है सिलीगुड़ी में वोटिंग की गणना अब तक भी शुरू नहीं हो सकी है तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वोट की पेट्टियां ठीक प्रकार से सील नहीं हुई है । बीजेपी के कार्यकर्ताओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के हेड क्वार्टर में मिठाई बनना शुरू हो चुका है। आगे की लाइव अपडेट्स के लिए हमारे इस ब्लॉग के साथ जुड़े रहें...

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत | Modi or Mamta Banerjee

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Mamta Banerjee  नरेंद्र मोदी का विजय रथ पश्चिम बंगाल के चुनाव में बहुत शक्ति से आगे बढ़ा है यह तो अनुमान पहले से ही था की पिछली बार के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन भाजपा कर सकेगी किंतु चुनाव को जीत लेना सरकार बनाने को लेकर जो एग्जिट पोल अब तक जानकारी दे रहे हैं बीजेपी की सरकार पश्चिम बंगाल में बनती हुई नजर आ रही है ममता दीदी के बाद अब लोग दादा को सत्ता में देखना चाहते हैं यह बड़ा बदलाव होगा पश्चिम बंगाल का रुख इस समय पर कुछ तो बदला जरूर है राष्ट्रीय राजनीति का प्रभाव और पश्चिम बंगाल अछूता रह जाए यह संभव नहीं। पिछली बार के चुनाव में 77 सीटों पर सिमटी बीजेपी इस बार ऊंची छलांग लगाकर 160 सीटों पर भी पहुंच सकती है सरकार गठन बीजेपी के हाथ में होगा पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ा राजनीतिक दल भी भारतीय जनता पार्टी बन सकती है। हालांकि पश्चिम बंगाल ममता बनर्जी का गढ़ है 4 तारीख को जब परिणाम आएंगे तब तो सब कुछ साफ हो ही जाएगा किंतु फिर भी एग्जिट पोल एक तरफा बीजेपी की जीत का दम भर रहे हैं बाकी यह बात किसी से छुपी नहीं है कि ममता बनर्जी पिछले 15 वर्षों से पश्चिम बंगाल की राजनीति के मजबूत स्तंभ के तौर पर ह...

पूरी कांग्रेस एक परिवार के सपने को पूरा करने में जुटी है | कौन जगाये कांग्रेस को!

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कांग्रेस यूं तो पूरे देश में अपने तीव्र पतन को देख रही है। एक के बाद एक कई निराशाएं उसके हाथ लगी। एक चुनाव में जीत का जरा कुछ मिठास मुंह लगती है, तो अगले कई चुनाव हार कर वह फीका हो जाता है। अभी हाल में मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने जो कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं एक ऐसा बयान दे दिया जिसके बाद उन्हें हताश और मानसिक दिवालियापन की स्थिति से जोड़ दिया गया। उन्होंने 21 मार्च 2026 को तमिलनाडु के चुनाव को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतंकवादी शब्द का प्रयोग किया और यह शब्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उपयोग किया गया। अब इस बात से धुआं तो उठाना था अगले ही दिन चुनाव आयोग की तरफ से कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष को इस संदर्भ में कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है। विषय गंभीर बन गया तमाम नेताओं की प्रतिक्रिया आने लगी और कांग्रेस एक बार घिरी घिरी फिर से नजर आती है। अपने लिए खुद समस्याएं बुन रही है आज की कांग्रेस।  यह बात कहने की है कि भारतीय जनता पार्टी के लोग अंधभक्ति में लीन हैं। किंतु कांग्रेसियों के लिए भी यह बात बिल्कुल गलत नहीं है गांधी परिवार की वंदना में कांग्रेसजनों ने वर्षों तक स्व...

ये ट्रंप नहीं सिकन्दर द्वितीय हैं | विश्व विजय का स्वप्न पूरा करने आऐ है

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अमेरिका एक शक्तिशाली राष्ट्र है निसंदेह वह आर्थिक शक्ति के तौर पर दुनिया का पहला है वही बात राजनीतिक ताकत की हो तो विश्व में सुपर पावर के नाम से हम अमेरिका को ही जानते हैं द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कैसे दुनिया की शक्ति का केंद्रीकरण टूट गया ब्रिटेन जो महाशक्ति कहलाता था अब क्षीर्ण हो चुका था जर्मनी की ताकत ने ब्रिटेन जैसी महाशक्ति को कमजोर कर दिया ब्रिटेन अब वह ना रहा जिसके बारे में कहा जाता था कि उसका कभी सूर्य अस्त नहीं होता दुनिया के तमाम देश जो ब्रिटेन के उपनिवेश थे अब धीरे-धीरे उसके हाथ से छूट रहे थे तमाम देश आजादी के आंदोलन में बहुत सक्रिय होते चले गए और उनकी आजादी अब एकमात्र रास्ता था जो ब्रिटेन अपना सकता था अंततः महाशक्ति का उपनिवेश अब स्वतंत्र हो गए। भारत भी उनमें से एक था इस बड़े परिवर्तन के साथ विश्व की राजनीति में शक्ति का विकेंद्रीकरण हो गया अब ब्रिटेन के स्थान पर विश्व की शक्ति दो धुरी में बंट गई एक तरफ अमेरिका और दूसरी तरफ सोवियत संघ अब यह दोनों राष्ट्र शक्तिशाली कहे जाने लगे कई वर्षों तक इनके बीच संघर्ष हुआ शीत युद्ध के नाम से यह संघर्ष चलता रहा दो महा शक्तियों के संघर...

Trump के अधूरे सपने | अपने ही निर्णय में घिरे हैं ट्रंप और विश्व राजनीति अधर में

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जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बनकर आए तो उन्हें स्वयं से किसी भी अन्य की अपेक्षा यहां तक कि उनके वोटरों की अपेक्षा भी ज्यादा उम्मीद थी वह दुनिया को एक बार फिर से अमेरिका से संचालित करना चाह रहे थे। उनका यह मानना था कि दुनिया उनके शक्ति को स्वीकार करेगी मानेगी कि अमेरिका विश्व शक्ति है सुपर पावर है जैसा कि वास्तव में है भी किंतु एक कड़वा सच यह है कि अब दुनिया अमेरिका से संचालित नहीं हो सकती या किसी भी एक देश से नहीं शक्तियों का तीव्र विघटन हो चुका है। पूरे विश्व में कई देश विशेषकर चीन रूस भारत और इस युद्ध के बाद ईरान भी श्रेणी में होगा जो शक्तिवान कहे जाएंगे। रूस, चीन और ईरान ने तो अमेरिका के प्रभुत्व को सीधे चुनौती दी है। यह इस युद्ध में साफ दिखा है।  डोनाल्ड ट्रंप एक उत्साहित नेता लगते हैं जिनके बयानों में बहुत आत्मविश्वास है किंतु धरातल पर स्थितियां फीकी नजर आती हैं अमेरिका को सर्व शक्तिमान सिद्ध करने की राह में डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को विश्व के सामने उसकी हद तक ले आए हैं जहां ईरान जैसे देश सर्व शक्तिमान के सम्मुख भी झुकने से इनकार कर देते हैं इसमें कोई दोहराई नहीं कि ची...

US-IRAN War | अमेरिका दुनिया के खिलाफ जंग में

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पिछले दिनों इस्लामाबाद में हुई अमेरिका ईरान की शांति वार्ता असफल रही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेड इवेंट्स प्रतिनिधि मंडल के साथ बिना किसी निर्णय पर पहुंचे वापस लौट के इसमें कोई हैरानी की बात भी नहीं है जैसा कि जर्मनी कहता है जर्मनी की तरफ से एक बयान आया है कि उन्हें इस शांति समझौते से पूर्व से ही कोई बहुत बड़ी उम्मीद नहीं थी क्योंकि इसे लेकर तैयारी पूरी नहीं की गई थी साथ ही यह संघर्ष लंबा चल सकता है और इससे पूरी दुनिया को बड़ी समस्याओं से गुजरना पड़ सकता है  दुनिया किन संकटों के मुहाने पर है:  हार्मोन स्ट्रेट इस जंग का केंद्र बन गया है इस स्थान के नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान अब आमने-सामने है दुनिया के व्यापार को लेकर हार्मोन स्ट्रीट बहुत अहम स्थान है यह ऊर्जा और खाद्य सामग्री के व्यापार को लेकर और उसकी आपूर्ति को लेकर पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है यदि अमेरिका अपनी दी गई इस चेतावनी को जो कि आज से लागू हो गई है कि वह समुद्र में नाकाबंदी करेगा उसकी नौसेना वहां से गुजरने वाले तमाम जहाज की जांच करेगी दुनिया यूं ही इस युद्ध के बाद ऊर्जा संकट में फंस चुकी है खड़ी की देश से महत्...

US - Iran युद्ध विराम वार्ता फेल

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USA-IRAN इस्लामाबाद में हो रही शांति वार्ता सफल नहीं हो सकी है। लगभग 14 घंटे तक चली इस वार्ता में अंतिम तौर से महत्वपूर्ण विषयों पर सहमति नहीं बन सकी है। जे डी वैंस जो कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति हैं, और अमेरिका का नेतृत्व कर रहे थे, ने पहले ही इस बात को कुछ हद तक साफ कर दिया था वार्ता में भी गहरा तनाव है। यह पूर्व से दिख रहा था।  बातचीत: 14 घंटे चली इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका की वार्ता। लिखित दस्तावेजों को दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने आदान-प्रदान किया। यह वार्ता बेहद महत्वपूर्ण: वास्तव में देखे तो मिडल ईस्ट में युद्ध का महान खतरा मंडरा रहा है। अब तक की तबाही को पूरी दुनिया ने देखा भी है, और इसकी वजह से संपूर्ण दुनिया जो संकट में आकर खड़ी हो गई है, यह साधारण नहीं है। यह एक वैश्विक आपदा के समान है। ऊर्जा संकट और होर्मूज को लेकर पूरे विश्व में समस्याएं बढ़ गई है। निरंतर इस बात पर संकट गहरा जा रहा है, यह तो पूर्व से ही दिख रहा था की दोनों देश बेहद गंभीर मांगो के साथ इस वार्ता में उतरे हैं। ईरान का पक्ष:  ईरान ने साफ किया कि कुछ मतभेदों पर वार्ता जारी रहेगी। जो महत्वपूर्ण हैं उन...

West Bengal में ममता युग का अंत यही | ModiNama

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ModiNama पश्चिम बंगाल की राजनीति अब अपने चरम पर हैं। चुनाव से ठीक पहले रेलिया का दौर है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे देश के दिग्गज नेता पश्चिम बंगाल पहुंचकर परिवर्तन का नारा दे रहे हैं। रही बात सत्तारूढ़ दल टीएमसी की तो वह भी पूरी ताकत के साथ बंगाल में बंगाल मॉडल की बात कर रहा है। क्षेत्रवादी शक्ति के तौर पर अपने आप को प्रस्तुत कर रही है, और इसी प्रयास में है कि किसी तरह से बाहरी दल के तौर पर राष्ट्रीय दलों को एक बार फिर से बड़ी मात दी जा सके। यह बड़ा दिलचस्प चुनाव होने जा रहा है, क्योंकि एक तरफ राष्ट्रवादी राजनीति का धड़ा कहे जाने वाली भारतीय जनता पार्टी का जोर है, और दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस जो इस समय अपनी सत्ता को बचाने के लिए पूरी तरह से क्षेत्रीय अस्मिता और बंगाली एकजुटता की बात कर रही है।। बंगाल में आने वाले 23 और 29 अप्रैल को दो चरण में वोटिंग होनी है। इसके बाद 4 मई को परिणाम भी सामने होंगे पश्चिम बंगाल के अलावा असम में पुडुचेरी में और केरल में भी चुनाव होने हैं। जिसमें असम चुनाव की प्रक्रिया हो चुकी है, वोटिंग वहां पूरी हो चुकी है, परिणाम आना बाकी है। इस तरह से देश के दूरस्थ...

Ganesh Godiyal के नेतृत्व में उत्तराखंड कांग्रेस की उड़ान

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उत्तराखंड में कांग्रेस की ताकत एक बार फिर से गणेश गोदियाल के साथ महसूस हो रही है। हालांकि ताकत का एहसास गणेश गोदियाल के नेतृत्व में इससे पूर्व के विधानसभा चुनाव के दौरान भी महसूस की गयी थी, और लोकसभा चुनाव के समय पर इसी प्रकार से कांग्रेस का एक जोरदार पक्ष समर्थक नजर आ रहा था। किंतु यह वोटो में तब्दील नहीं हो सका, इसके पीछे क्या कारण है वह एक लंबी चर्चा है। कम से कम लोकसभा चुनाव में गढ़वाल सीट से जरूर मुकाबला अनुमान किया जा रहा था। प्रदेश में कई मुद्दों ने और उन मुद्दों पर संबंधित वर्ग के आंदोलन ने राजनीति तेज की है, सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। और इन आंदोलन को विपक्ष ने जन समर्थन हासिल करने की एक दवा के तौर पर उपयोग भी किया है। जो कांग्रेस के हाथों से छटकता रहा। जैसे उपनल कर्मियों को लेकर नए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का यह बयान कि हम सरकार में आते ही आपका नियमितीकरण तुरंत प्रभाव से करेंगे। उधर गैरसैंण राजधानी को लेकर भी कांग्रेस का रुख बिल्कुल साफ नजर आया है, की ग्रीष्मकालीन राजधानी भी हमने बनाई और पूर्ण राजधानी भी हम ही बनाएंगे। इस तरह से कांग्रेस क्षेत्रीय दलों की उसे...

Bihar election results | NDA की जीत महागठबंधन की करारी हार

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बिहार के विधानसभा चुनाव का परिणाम अब सामने है। एनडीए सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत लेकर आया है। यह बहुमत के आंकड़े को पार कर चुका है। बिहार में सरकार बनाने के लिए 122 सीटों की आवश्यकता होती है लेकिन एनडीए का गठबंधन इस समय पर 200 का आंकड़ा छू रहा है। और अब लगभग तय हो चुका है, कि गठबंधन 200 या अधिक सीटें लेकर सरकार गठित कर रहा है। यह अब तक की सबसे बड़ी जीत है जो एनडीए को प्राप्त हुई है 2010 के बाद। 2010 में भी इसी प्रकार का जनमत देखने को मिला था। बात अगर जदयू की करें तो इस समय पर जेडीयू अपने पिछले प्रदर्शन से दुगना लगभग 85 सीटों पर जीत हासिल कर रही है। बीजेपी 90 या उससे आगे पहुंच चुकी है। वही बात लोजपा की करें जो 29 सीटों पर चुनाव लड़ती है, और इस समय पर 19 सीट जीत हासिल करने के कगार पर है। नरेंद्र मोदी ने चिराग पासवान पर विश्वास जताया उनकी मांग के अनुसार उन्हें 29 सीटें दे दी सभी इस बात पर चर्चा कर रहे थे, कि यह कुछ अधिक सीटें चिराग पासवान को सौंप दी गई हैं। लेकिन उसके बावजूद भी चिराग पासवान ने अपने विश्वास को बनाए रखा, और अच्छी संख्या में सीट हासिल की। यदि विपक्षी गठबंधन की बात करें त...

Bihar election result : बिहार में इस गठबंधन को मिल रही बंपर जीत | 16 एग्जिट पोलों ने साफ किया

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बिहार दूसरे चरण की वोटिंग पूरी हो जाने के बाद एग्जिट पोल अब नतीजे दिखा रहा है। जहां एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर आ रहा है। एग्जिट पोल में एनडीए को 154 सीटें हासिल हुई हैं। वहीं 83 सीटें महागठबंधन को प्राप्त हो रही है, और अन्य को 6 सीटें प्राप्त हुई हैं। बिहार में नई-नई राजनीतिक पार्टी जन सुराज उतनी असरदार नहीं रही। जिन्हें 3 से 5 सीट हासिल हो रही हैं। यह लगभग 16 एग्जिट पोल के नतीजे का समेकित निर्णय है। सभी में एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर आ रहा है। बिहार में कुल 243 सीटों पर चुनाव हुआ है। दो चरणों में चुनाव हुए और 14 नवंबर को बिहार चुनाव का परिणाम सामने होगा। पिछले चुनाव में एनडीए को 125 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। वही महागठबंधन को 110 सीटों पर जीत प्राप्त हुई थी। अन्य को 8 सीटें प्राप्त हुई इस आधार पर यदि एग्जिट पोल के नतीजे को देखा जाए तो एनडीए को पिछले परिणाम की अपेक्षा 29 सीटों का लाभ की आकांक्षा इस समय पर है। और महागठबंधन को 28 सीटों के नुकसान का अनुमान है। हालांकि इस समय पर बिहार में हुई बंपर मतदान ने लोगों के रुझान को दर्शाया है, यह भी बात हुई कि यह महागठबंधन के पक्ष में और...

कौन बनेगा मुख्यमंत्री बिहार | राहुल मछली पकड़ते दिखे

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बिहार में 14 नवंबर को चुनाव के परिणाम सामने होंगे। और नए मुख्यमंत्री भी तय हो जाएंगे। साफ तौर से विपक्षी महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार किया गया है। महागठबंधन में बिहार के चुनाव में तेजस्वी यादव ही नेतृत्व कर रहे हैं। हालांकि एक बड़ी पार्टी कांग्रेस उनके साथ है, लेकिन कांग्रेस का प्रभाव बिहार के राजनीति में कुछ कमजोर होता रहा है। उतनी ही मजबूत आरजेडी होती रही इससे पूर्व के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन न होने के चलते आरजेडी सरकार बनाने में असफल हो गई। हालांकि राजद ने अपने स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया अच्छी सीटें भी लेकर आई। लेकिन कांग्रेस से जितनी सीटों के आशा थी, क्योंकि वह प्राप्त न हो सकी इसलिए तेजस्वी यादव का मुख्यमंत्री बनने का सपना यूं ही रह गया। लेकिन इस बार रणनीति को कुछ अधिक मजबूत बनाने की कोशिश की गई है, लगभग सभी विपक्षी दलों को एकजुट कर एक महागठबंधन तैयार किया गया है। किसी भी राजनीतिक दल को ना छोड़ा जाए जिससे आरजेडी को किसी भी सीट पर नुकसान हो सके। अंतिम रूप से इस रणनीति का परिणाम 14 नवंबर को साफ हो जाएगा। जिन अतिरिक्त दलों क...

सेनारी नरसंहार | 18 मार्च 1999 बिहार के जातीय संघर्ष का काल पृष्ठ

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सेनारी नरसंहार बिहार; 18 March 1999 का दिन था। बिहार का एक छोटा सा गांव सेनारी जहां इस दिन ऐसी घटना हुई जिसने सारे देश को चकित कर दिया यूं कहें कि झकझोर कर रख दिया। बिहार में जातीय नरसंहार जातीय हिंसा का एक ऐसा सत्य इस गांव में देखा गया जिसे बिहार के इतिहास के एक और पृष्ठ को काला कर दिया यह घटना है सेनारी का नरसंहार।  सेनारी गांव में मार्च माह की 18 तारीख को सामान्य दिनों की तरह लोग अपने कामकाज पर थे। धीरे-धीरे शाम ढलने लगी और जब रात के लगभग 7:30 बज रहे थे, गांव से कुछ दूर पगडंडी पर एक धूल का गुब्बार उठने लगा। गांव के लोगों को लगा कि यहां शायद पुलिस कोई अभियान पर है दरअसल 500 के करीब लोगों की भीड़ पगडंडी पर चल रही थी इनमें बहुत से लोगों ने पुलिस के कपड़े पहने थे और बहुत से लोग लूंगी और बनियान में थे लेकिन सभी हथियारबंद थे अभी तक गांव के लोगों को यह नहीं मालूम था कि आने वाले दो-चार घंटे में सेनारी गांव बिहार के इतिहास का एक भयानक हिस्सा बनने वाला है। उस भीड़ में कुछ लोग गांव के समीप की एक चौकी की तरफ बढ़ गए बाकी बचे हुए लोग गांव की तरफ आ गए गांव में एक धमाका हुआ गांव के लोगों न...

Rahul Gandhi news | वोट चोरी का मुद्दा कैसे कामयाब?

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हाल में रायबरेली में राहुल गांधी जी अपनी एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा चुनाव आयोग तानाशाह है इस विषय को वह काफी लंबे समय से उठा रहे हैं लोकसभा की चुनाव के बाद एवं ईवीएम पर सवाल उठाते रहे अब कुछ समय से चुनाव आयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं  बिहार में शीघ्र ही चुनाव होने वाले हैं किंतु चुनाव आयोग पर उठाए सवालों को लेकर दोष सिद्धि अभी तक नहीं हुई है कौन दोषी हैं और उन्हें सजा कौन देगा? ना ही कांग्रेस इसे कोर्ट में शिकायत के तौर पर दर्ज करती हैं ऐसे में बिहार का चुनाव वही चुनाव आयोग करवाएगा जिस पर राहुल गांधी जी दोष लगा रहे हैं साफ है कि अगर राहुल गांधी जी बिहार में चुनाव हार जाते हैं तो वह फिर यही कहेंगे की बिहार में भी वोट चोरी हो गई है अब इसका समाधान क्या है।। यदि राहुल गांधी जी बिहार में राजद के साथ मिलकर चुनाव जीत जाते हैं तो इसके बाद उनका क्या जवाब होगा यह भी जानना दिलचस्प होगा क्या इसके बाद वे यह कहेंगे कि अब हम चुनाव जीत गए हैं इसलिए चुनाव आयोग अब ठीक है इन दो बातों में कोई एक बात अवश्य होगी देखना होगा कि बिहार में कांग्रेस यदि अपनी उम्मीद के अनुसार चुनाव में प्रदर्श...

प्रेमचंद अग्रवाल का इस्तीफा और अब सवाल महेंद्र भट्ट से

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श्री प्रेमचंद अग्रवाल को एक अदूरदृष्ट नेता के तौर पर याद किया जाएगा। जिन्होंने अपनी कही बात पर इस्तीफा दिया मंत्री पद को त्याग और इससे यह साबित होता है, कि आपने गलती की है। अन्यथा आप अपनी बात से, अपनी सत्यता से जनमानस को विश्वास में लेते, पार्टी को विश्वास में लेते और चुनाव लड़ते। आपके इस्तीफे ने आपकी गलती को साबित कर दिया। उन्होंने राज्य आंदोलन के दौरान अपनी भूमिका को स्पष्ट किया, अपना योगदान बताया और आखिरी तौर से वे भावनाओं से भरे हुए थे, उनके आंसू भी देखे गए। इसी पर उन्होंने अपने इस्तीफा की बात रख दी वह प्रेस वार्ता हम सबके सामने हैं।  यहां से बहुत कुछ बातें समझने को मिलती है, राजनीति में बैक फुट नहीं होता है, राजनीति में सिर्फ फॉरवर्ड होता है। यह बात उस समय सोचने की आवश्यकता थी, जब इस तरह का बयान दिया गया था, जिसने इतना बड़ा विवाद पैदा किया। यह नेताओं की दूर दृष्टि का सवाल है, उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि उनके द्वारा कही बात का प्रभाव कितना व्यापक हो सकता है। राजनीति में आपके द्वारा कही बात पर आप आगे माफी लेकर वापसी कर पाएंगे ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि उसका प्रभाव कभी-कभी इतना ...

तो ये हैं दिल्ली के नए मुख्यमंत्री | New CM Delhi | Delhi Election

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दिल्ली में मुख्यमंत्री कौन होगा? यह सवाल अभी बना है, चर्चाएं अब भी जारी हैं। निश्चित रूप से बीजेपी इस चयन के माध्यम से पूरे देश में एक संदेश देने की कोशिश करेगी। 27 साल बाद बीजेपी दिल्ली में वापसी कर रही है। 70 विधानसभा सीटों में 48 पर भाजपा ने जीत हासिल की शेष 22 आम आदमी पार्टी को जीत मिली और कांग्रेस यथावत स्थिति पर रही। ऐसे में भाजपा संगठन में भी खुशी की लहर है। साथ ही दिल्ली की जनता के आशा और अपेक्षाएं बड़ी हैं। एक तो दिल्ली में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है, दूसरी ओर मोदी जी की सरकार है, जनता की अपेक्षाओं पर खडा उतरने के लिए भाजपा संगठन की तरफ से एक योग्य और क्षमतावान व्यक्ति को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया जाना है, साथ ही ऐसे व्यक्ति का चयन करना है जिससे पूरे देश में एक संदेश जा सके। दिल्ली के इस विधानसभा चुनाव में एक खास बात यह भी देखने को मिली कि भाजपा ने चुनाव के समय किसी चेहरे पर मोहर नहीं लगाई थी, बिना चेहरे के दिल्ली का चुनाव लड़ा और जीत भी गई। यही बात जब इंडिया गठबंधन के लिए पिछले लोकसभा चुनाव में उनके द्वारा इस तरह से लड़ा जा रहा था। जब उनसे पूछा जाता था, कि यदि गठबंधन जी...

केजरीवाल की हार ही राहुल गांधी की जीत है!

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दिल्ली चुनाव के परिणामों ने कांग्रेस की भविष्य को लेकर स्थिति को साफ कर दिया है। कांग्रेस ने देश भर में गठबंधन के नेताओं को और पार्टियों को एक संदेश दिया है। यदि गठबंधन के मूल्यों को और शर्तों को चुनौती दोगे, तो कांग्रेस भी इसमें केंद्र बिंदु में रहकर अपनी जमीन को सौंपती नहीं रहेगी। बल्कि दमदार अंदाज में चुनाव लड़कर दिल्ली की तरह ही अन्य जगहों पर भी चुनाव लड़ेगी। आम आदमी पार्टी की हार हो जाने से राहुल गांधी जी का गठबंधन में स्तर पुनर्स्थापित हुआ है। कारण यही है कि अब तक अरविंद केजरीवाल जी दिल्ली में सरकार बनाकर एक ऐसे नेता बने हुए थे, जो मोदी जी के सामने अपराजिता हैं। जिन्हें हराया नहीं गया है, विशेष कर मोदी जी के सामने। वह एक विजेता नेता की छवि के तौर पर गठबंधन के उन तमाम नेताओं में शीर्ष पर थे। अब विषय यह था, कि राहुल गांधी जी की एक हारमान नेता की छवि के तौर पर जो स्थिति गठबंधन में थी, वह केजरीवाल जी के होने से गठबंधन के अन्य नेताओं में शीर्ष होने की स्वीकार्यता हासिल नहीं कर पा रही थी। राहुल गांधी जी को गठबंधन के शीर्ष नेता के तौर पर जो स्वीकार्यता मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिल पा रही...

कांग्रेस के कदम | Loksabha चुनाव 2024

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राहुल गांधी से ही कांग्रेस पार्टी के हर स्तर पर चुनाव कर आंतरिक लोकतंत्र की स्थापना की बात करते रहें हैं। यह परिवारवाद के उस बड़े सवाल का जिसे लगातार भारतीय जनता पार्टी द्वारा उठाया जाता रहा है, का परिणाम है। नागालैंड में प्रचार रैली में मोदी जी ने परिवारवाद के हवाले से पुनः कांग्रेस को घेरा। ऐसे में कांग्रेस इन सवालों के निदान में पूरा जोर लगा रही है। कांग्रेस पार्टी के अहम निर्णय लेने वाली कार्यसमिति में सदस्यों की संख्या कुछ बढ़ाई गई। अब 30 सदस्य कार्यसमिति में होंगे। इसमें महिलाओं, एससी, एसटी, युवाओं आदि को आरक्षण भी दिया गया है। किंतु जब यह तय किया गया कि कांग्रेस पार्टी कि निर्णय लेने वाली अहम कार्यसमिति के सदस्यों का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह प्रस्ताव पारित किया गया कि मलिकार्जुन खरगे जी जो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, को यह अधिकार होगा कि वह सदस्यों को नामित करें, ऐसे में कांग्रेस पर लगने वाले परिवारवाद के सवालों के निवारण अभियान से जो वह आंतरिक हर स्तर पर चुनाव के माध्यम से दर्शाना चाहती थी, से पीछे हट गई। ऐसे में राहुल गांधी और गांधी परिवार का कोई सदस्य संचालन समि...