गरीब के प्याज | Hindi literature, Diwakar Godiyal

 

गरीबी अभिशाप है। जो इसे जीता है वही जानता है कि हर क्षण यह दुनिया उसे इसका आभास कराती है विशेष कर वह गरीबी जो हमेशा अमीरों के बीच दौड़ धूप करती हो उसे आभास होता है कि वह गरीब है उन सब के बीच सबसे बुरी स्थिति में है।

गरीबों के बीच गरीबी अच्छी हो सकती हैं। एक गांव हो जहां सभी एक जैसे पत्थर के मकान हो तो सबके हो, कुछ पालतू जानवर हो तो सबके हो, और बाकी अपना परिवार। लेकिन यह बुद्धिमत्ता और बेहतर होने की होड़ न हो। सचमुच वह गांव गरीबों का जरूर होगा किंतु खुशहाल किसी अमीर से अमीर गांव से कई अधिक होगा। 

कल घर से निकला तो कोई खास उद्देश्य तो था नहीं बस चलते रहना था। लेकिन मुझे रुकना पड़ा एक आदमी प्याज का ठेला लगाए हुए था। उसमें बहुत कम एक किनारे पर लहसुन थे बाकी प्याज थे, इतना भी नहीं की ठेला भरा हो‌। मैंने देखा एक जोड़ा अपनी स्कूटी पर ठेले के पास आकर रुका वह उतरा भी नहीं बैठे-बैठे ही पूछा प्याज के भाव उस ढेले वाले आदमी ने जो भाव बताया वह उन्हें समझ नहीं आया पत्नी ने कहा पति को "चलो" 

स्कूटी की गति बढ़ता ही था पति की, ठेले वाले का एक और ऑफर आया कुछ कम लगाकर, पत्नी ने अपनी बात साफ बता दी कि मैं प्याज के इतने रुपए दूंगी। वह ढेले वाला कुछ बोल भी पता की पत्नी ने फिर पति को कह दिया "चलो" 

पति के लिए ज्यादा क्या करने को था बस घुमाया हाथ और स्कूटी दौड़ पड़ी। उतने में ही वह ढेले वाला भी बोल उठा "ठीक है इतने में ही ले जाओ" 

लेकिन अब तक गाड़ी दौड़ चुकी थी पीछे से एक प्याज भी ठेले से लुढ़क गया वह ठेला वाला उसे उठाने को दौड़ा।

वही 10-12 मीटर की दूरी पर तो एक मंडी जितना बड़ा सब्जी का बाजार सजा है। पति-पत्नी का जोड़ा तो वहां पहुंच गया ठेले वाला बैठ गया सोचता होगा बेच ही देता। लेकिन 1 किलो प्याज बिक जाने में कमा भी कितना लेता।

इस संघर्षशील समाज में हर कोई अपना लाभ ढूंढता है। गरीबी यदि बेईमानी और चतुराई सीख जाए तो मैं सुनता हूं कि कुछ तो है जो भीख मांग कर भी कोठियां खड़ी कर रहे हैं। लेकिन उनके व्यवहार का दंड एक ईमानदार गरीब उठा रहा है, कभी मैं सोचता हूं गरीब के लिए यह मानवीय मूल्य कौन तय करता होगा। वह तो गरीब है यदि वह सद्गुणों के साथ जिएगा तो इस दुर्गुण समाज में अपने लिए कुछ भी कैसे छीन पाएगा। यह दुनिया तो उसे कुछ भी नहीं उठने देगी और वह जहां था वहीं रह जाएगा।

ऐसे में एक व्यक्ति को जो गरीब है होना कैसे चाहिए?

क्या मानवीय समाज के बंधन उसके लिए भार नहीं है वह तो समाज के अमीरों को अमीर होने का एहसास दे रहा है यदि वह गरीब ना होता तो कोई खुद को अमीर कैसे का पता कोई तुलना ही किससे करता, कभी तो ऐसा लगता है किंतु वह यदि चोरी कर दे, उसे दंड क्यों दिया जाना चाहिए इसलिए कि वह गरीब है या इसलिए कि अपनी पूरी शक्ति लगाकर भी वह जो प्राप्त नहीं कर सका है उसे वह छीन लेना चाहता है।

किंतु यह विचार समाज में विद्रोह पैदा करता है, समाज के ताने-बाने को बिगाड़ सकता है, सब कुछ नष्ट कर सकता है।

किंतु सच कहूं तो मुझे वही विचार अच्छा लगा कि एक गांव हो जहां लोग गरीब हो किंतु सुशिक्षित हो वह वास्तविक तौर से अधिक खुशहाल होंगे।।

Comments

  1. वाकई गरीब एक अभिशाप हैंभी काम करो दिन भर धूप हो या बारिश करना पड़ता हैं तभी जाकर परिवार को पालना पड़ता है गरीब को कभी भी ऊंचाई को नहीं देखना चाहिए कि वो अमीर है अपने बराबरी को देखना चाहिए खुशहाली तो अपनी झोपड़ी में ही होती हैं प्याज़ वाले ने सोचा मैं वहीं भाव में देता जो औरत ने लगाई थी बिक जाने पर मैं कमा भी कितना लेता इस संघर्षशील समाज में हर कोई लाभ ढूंढता है सच में विचार अच्छा लगा एक एक गांवों हो जहां गरीब लोग हो सुशिक्षित हो ओर अधिक खुशहाल होंगे 👍

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