क्या ए आई या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता कहा जाता है भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है। बहुत से लोगों के रोजगार को समाप्त कर देगा, जैसा कि शुरुआती दौर में दिखता है और हम अनुमान लगा सकते हैं कि ए आई या कृत्रिम बुद्धिमत्ता कैसे चीजों को सरल बना देता है। एक साधारण से स्कूल कॉलेज के प्रोजेक्ट को जो विद्यार्थी के लिए तो एक चुनौती ही होती है कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से आसानी से इसे बनाया जा सकता है और बड़ी मात्रा में विद्यार्थी इसका उपयोग कर रहे हैं किंतु इसका बढ़ता उपयोग निश्चित रूप से विद्यार्थियों को आक्रमण्य और अनुशासनहीन बना रहा है। इससे चीजों में सरलता तो आई है किंतु विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए वह चिंतन मंथन कर ही यदि अपने प्रयोग और फाइल इत्यादि को बनाएं तो अधिक उचित होगा।
भारत ए आई का समिट 2026 भी जारी है। और इसमें अलग-अलग प्रकार से ए आई के बढ़ते उपयोग को समाज के लिए उचित बनाने को लेकर बातें की जा रही है। ऐसा संभव भी है कि समय के साथ अपनी नीतियों के चलते हम ए आई पर नियंत्रण रखते हुए उसे सही उद्देश्य के लिए शक्तिशाली माध्यम बना सके जैसा की अनियंत्रित रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता कई चुनौतियां भी पैदा कर सकती है यह बात साफ है। हाल में एक खबर यह भी रही की सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई की बहुत से वकील तमाम याचिकाओं को जो दायर कर रहे हैं उसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर रहे हैं और इसके चलते उन याचिकाओं में कई प्रकार की खामियां भी देखने को मिल रही है।
किंतु आई का नियंत्रित उपयोग निश्चित रूप से चीजों को सरल बनता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर नीति समावेशी होनी चाहिए, जिसमें मानव समाज के सर्वांगीण उन्नति हो। औद्योगिक युग में जिस प्रकार से समाज ने बड़ा परिवर्तन देखा हमने देखा कि किस तरह से मानव बड़ा समाज उससे प्रभावित हुआ। कार्यशैली बदली मशीनों ने मानव का स्थान लिया किंतु धीरे-धीरे संसार उसी के साथ बढ़ता चला गया। औद्योगिक युग में अभियांत्रिकी का बड़ा महत्व था। यहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में बदलती शैली को नियंत्रित कर चलना अति आवश्यक है।।

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