15 सालों तक 60 लोग एक द्वीप पर फंसे रहे | एक मार्मिक कहानी
यह उस समय की बात है जब फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों का पूरी दुनिया पर प्रभुत्व था इनके दुनिया भर में कई उपनिवेश थे भारत भी इसी प्रकार से ब्रिटेन का एक उपनिवेश देश था या यूं कहें की भारत अंग्रेजों का गुलाम था ठीक इसी प्रकार फ्रांसीसियों ने भी दुनिया के तमाम देशों पर अपना कब्जा जमा रखा था अफ्रीकी महाद्वीप के कई क्षेत्रों में फ्रांस का प्रभाव था यहीं से एक बड़ी मार्मिक कहानी शुरू होती है जहां 15 सालों तक लोग एक द्वीप पर फंसे रहे जहां 60 लोगों को होना चाहिए था वहां आखिर में केवल सात लोग और एक बच्चा ही जीवित बचा।
1761 में फ्रांस का एक वाणिज्यिक जहाज जिसका नाम एल यूटल था मेडागास्कर से निकलता है मॉरीशस के लिए। इस जहाज में बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री अन्य वस्तुएं और सबसे महत्वपूर्ण कई अफ्रीकी मजदूर थे जिन्हें मॉरीशस बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। यह सब गैरकानूनी ढंग से हो रहा था इन सब कामों से भी उपनिवेशी सरकार व्यापार किया करती थी और लाभ कमाया करती थी उस दौर में अफ्रीका के तमाम देशों से गांव-गांव से लोगों को जबरन उठाकर बाहर दुनिया में बेच दिया जाता था उनसे काम करवाया जाता था।
इसी प्रकार का एक जहाज था एल यूटल जो 1761 में मेडागास्कर से मॉरीशस के लिए निकला था। इस जहाज में 160 अफ्रीकी गुलाम जिनमें पुरुष महिलाएं और बच्चे शामिल थे साथ ही 142 फ्रांसीसी नाविक और अधिकारी भी इस जहाज में यात्रा पर निकल पड़े जहाज की कमान जीन डी ला फार्गू के हाथों में थी जबकि नेविगेशन की जिम्मेदारी बार्थेलेमी कैसटेलैन डु बर्नेर्ड के पास थी।
यह सफर कोई छोटी यात्रा न था 4 से 6 दिन का लंबा सफर था। समुद्र की उफनती लहरों और तूफानों का खतरा बना रहता था इस पूरी तरह से भरे हुए जहाज को लेकर जब वे आगे बढ़ रहे थे तो 31 जुलाई 1761 की रात को तेज तूफानों में और समुद्र की लहरों में एक बड़ी घटना घटी यहां लगभग मेडागास्कर से 570 किलोमीटर दूर एक निर्जन द्वीप था ट्रेमलिन आईलैंड और इस आईलैंड के चारों तरफ समंदर में समुद्री रीफ फैली हुई थी। इसका तात्पर्य है कि द्वीप से दूर-दूर तक समुद्र के भीतर चट्टानें।
जब 31 जुलाई 1761 की रात को फ्रांसीसी जहाज इस द्वीप के समीप से गुजर रहा था तो तूफानों में फंसकर वह समुद्री रीफ से जा टकराया और जहाज डूबने लगा कई अफ्रीकी मजदूर जो जहाज में नीचे के डेक में थे जहाज के साथ डूबने लगे।
क्योंकि फ्रांसीसी अधिकारी और अन्य लोग जहाज के ऊपरी हिस्से में थे वह किसी तरह से समुद्र में कूद कर आईलैंड की तरफ बढ़ने लगे कई अफ्रीकी मजदूर जहाज के निचले हिस्से में क्योंकि टकराव के कारण बड़ा छेद हो गया था उससे बाहर निकलकर किसी तरह जहाज के मलवे, टूटी हुई लकड़ियों को पड़कर आईलैंड की तरफ बढ़ने लगे। जब वह आईलैंड पर पहुंचे तो उन्होंने देखा ट्रेमलीन पूरी तरह से निर्जन द्वीप था रात का समय था किसी तरह से उन्होंने इस समय को बिताया मालूम हुआ कि कुल यात्रियों में केवल 122 फ्रांसीसी नाविक और 60 अफ्रीकी गुलाम केवल किनारे पर पहुंच सके बाकी सब इस घटना में जीवित नहीं बचे। ट्रेमलिन द्वीप लगभग 1.7 किलोमीटर लंबा और 700 मीटर चौड़ा जिसकी ऊंचाई भी नाममात्र की थी पेड़ पौधों का कोई स्थान नहीं था और ना ही पानी का कोई स्रोत था इस तरह यह बड़ा कठिन आइलैंड था।
जहाज के कमांडर ने आदेश दिया कि जहाज जो डूब चुका है उसमें जो कुछ खाद्य सामग्री है और जिसे उपयोग किया जा सकता है उसे हमें आइलैंड तक लाना है इसके लिए अफ्रीकी गुलाम को समुद्र में भेजा गया वह किसी तरह से खाद्य सामग्री और तमाम वस्तुओं को आईलैंड तक लाते हैं किंतु कमांडर के मन में बड़ा सवाल था कि क्या कोई उन्हें बचाने यहां आएगी क्योंकि यह सब गैर कानूनी था और आधिकारिक तौर से किसी मदद की कोई अपेक्षा नहीं थी कमांडर ने आदेश दिया की जो कुछ खाद्य सामग्री हमारे पास है हर किसी को एक दिन में केवल एक बार ही भोजन मिलेगा। यह सब दो-तीन दिन तक तो ठीक से चलता रहा लेकिन पानी धीरे-धीरे समाप्त हो गया।
कुछ लोगों ने जाकर समुद्र में पानी पीने की कोशिश की लेकिन इससे उनके स्थिति और बिगड़ने लगी तब कुछ अफ्रीकी गुलाम ने द्वीप के बीचों बीच खोदना शुरू किया और कुछ गहराई तक खुदाई करने के बाद वहां मिट्टी गीली दिखने लगी जल का स्रोत बन गया यह पानी समुद्र का ही था किंतु रेत से छंट कर यह पीने योग्य हो गया था इस तरह से पानी का प्रबंध तो हो गया उनकी जान में जान आई लेकिन कमांडर अब भी सोच रहा था कि हमें अपनी मदद स्वयं करनी होगी उसने आदेश दिया कि डूबे हुए जहाज के मलबे को लकड़ियों को आईलैंड पर लाया जाए और इसे एक जहाज बनाया जाए अफ्रीकी गुलाम इस काम पर लग गए दो महीने के अंदर एक जहाज का निर्माण किया गया।
अब जहाज तैयार था इस जहाज में मेडागास्कर की तरफ लौटने के लिए जो भी सवार हुए वह सभी फ्रांसीसी लोग थे कोई भी गुलाम उसमें सवार ना हो सका। जहाज पर सवार लोगों ने सबसे कहा कि हम तुम्हारे लिए मदद लेकर वापस पहुंचेंगे यह जहाज बड़ी कठिनाई के साथ रास्ते में जहाज में फैल गई बीमारी के बाद किसी तरह मेडागास्कर जा पहुंचा।
मेडागास्कर में उन्होंने इस पूरी कहानी को वहां के गवर्नर को बताया लेकिन गवर्नर पूरी तरह से मदद करने के लिए तैयार नहीं था वह युद्ध की स्थिति में था दूसरी तरफ उसने इन लोगों पर आरोप लगाया कि तुम यह सब गैरकानूनी करते हो और इस तरह से मदद नहीं पहुंच सकी जिन लोगों पर मदद की अपेक्षा थी वे एक किनारे शांत हो गए वहां दूसरी तरफ ट्रेमेलिन आइलैंड पर जो बचे हुए लोग थे वह हर दिन समुद्र की तरफ देखते इस आशा से की कोई उनकी मदद करने आएगा।
समय बितता गया अब वह समझ गए थे कि उन्हें अपनी मदद स्वयं करनी होगी उन्होंने इस द्वीप पर छोटे-छोटे मिट्टी के घर बनाना शुरू कर दिया जो कुछ अवशेष वहां दिखे उससे घर बनाया अपने जल के स्रोत को और गहरा करते रहे और इस प्रकार किसी तरह हुए अपने जीवन की आश को जिंदा रखा। समुद्री जीवों पर भोजन के लिए वह पूरी तरह से निर्भर थे कुछ समय बाद उन्होंने भी किसी तरह वहां शेष जहाज के मलवे से और तमाम अन्य चीजों से मिलकर एक छोटी सी नाव बनाई और इस नाव में लगभग 20 लोग सवार होकर मेडागास्कर की तरफ निकल पड़े इस उम्मीद में कि जब वे मेडागास्कर पहुंचेंगे तो वहां से मदद को लेकर आएंगे। लेकिन इस नाव में सवार 20 लोगों का कोई पता नहीं चला ट्रेमेलिन पर फंसे लोग अब लंबे समय से वहां थे और वह एक छोटे से समाज के रूप में वहां रहने लगे थे लेकिन यह बिल्कुल आसान नहीं था।
उधर मेडागास्कर में जब नया गवर्नर नियुक्त होता है। किसी तरह से एक पत्र उसके हाथ पहुंचता है जो उन कुछ लोगों में से जो वापस लौट आए थे उस पहले बनाए गए जहाज में उनमें से कुछ लगातार प्रयास कर रहे थे। उन्हीं में से किसी का वह पत्र था जो गवर्नर के पास जा पहुंचा जब गवर्नर ने इस कथा को पढ़ा तो वह चकित रह गया और तुरंत मदद के लिए अभियान भेजा। पहला अभियान जब उस तरफ गया तब तक लगभग 15 साल बीत चुके थे शुरुआती प्रयासों में तो वे द्वीप तक पहुंच ना सके क्योंकि समुद्र में उस द्वीप के चारों ओर बड़ी-बड़ी रीफ फैली हुई थी लेकिन अगले प्रयास में वे उस द्वीप पर जा पहुंचे और जो उन्होंने देखा व चकित करने वाला था।
उस द्वीप पर केवल सात महिलाएं और एक बच्चा जीवित था वहीं पर वह गड्ढा भी था जिससे जल प्राप्त कर वे जी रहे थे और इस तरह से यह एक मार्मिक घटना बनकर रह गई उन्हें वापस लाया गया लेकिन जो उस द्वीप पर खो गया था उन 15 वर्षों में वह सब बस एक कहानी बन गया।।

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