ये ट्रंप नहीं सिकन्दर द्वितीय हैं | विश्व विजय का स्वप्न पूरा करने आऐ है
अमेरिका एक शक्तिशाली राष्ट्र है निसंदेह वह आर्थिक शक्ति के तौर पर दुनिया का पहला है वही बात राजनीतिक ताकत की हो तो विश्व में सुपर पावर के नाम से हम अमेरिका को ही जानते हैं द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कैसे दुनिया की शक्ति का केंद्रीकरण टूट गया ब्रिटेन जो महाशक्ति कहलाता था अब क्षीर्ण हो चुका था जर्मनी की ताकत ने ब्रिटेन जैसी महाशक्ति को कमजोर कर दिया ब्रिटेन अब वह ना रहा जिसके बारे में कहा जाता था कि उसका कभी सूर्य अस्त नहीं होता दुनिया के तमाम देश जो ब्रिटेन के उपनिवेश थे अब धीरे-धीरे उसके हाथ से छूट रहे थे तमाम देश आजादी के आंदोलन में बहुत सक्रिय होते चले गए और उनकी आजादी अब एकमात्र रास्ता था जो ब्रिटेन अपना सकता था अंततः महाशक्ति का उपनिवेश अब स्वतंत्र हो गए।
भारत भी उनमें से एक था इस बड़े परिवर्तन के साथ विश्व की राजनीति में शक्ति का विकेंद्रीकरण हो गया अब ब्रिटेन के स्थान पर विश्व की शक्ति दो धुरी में बंट गई एक तरफ अमेरिका और दूसरी तरफ सोवियत संघ अब यह दोनों राष्ट्र शक्तिशाली कहे जाने लगे कई वर्षों तक इनके बीच संघर्ष हुआ शीत युद्ध के नाम से यह संघर्ष चलता रहा दो महा शक्तियों के संघर्ष में दुनिया बड़ी समस्याओं से गुजरी कई देश युद्ध जैसी स्थिति में रहे विचारधारा की लड़ाई थी दो महाशक्ति की लड़ाई थी जो सीधे-सीधे आमने-सामने तो नहीं थे किंतु परोक्ष रूप से विश्व इसे महसूस कर रहा था या यूं कहे की सीधी तौर से इस संघर्ष में था।
आखिरकार 80 और 90 के दशक में सोवियत संघ टूट गया इससे कई देशों का निर्माण हुआ और अब सोवियत संघ भी महाशक्ति के उस ऊंचे पायदान से उतर चुका था शेष रहा अमेरिका और वह आज तक भी उसी यात्रा में है। विश्व की आर्थिक महाशक्ति बन गया और विश्व को यह स्वीकार करना भी पड़ा कि अमेरिका ही सुपर पावर है वह इसी आर्थिक शक्ति के आधार पर राजनीतिक शक्ति भी बन गया। कई कारक हैं जो अमेरिका को विश्व की राजनीति में विशेष स्थान दिलाते हैं और उसके स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं।।
अमेरिका के लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में एक लंबी यात्रा रही वहां कई बड़े-बड़े नाम राष्ट्रपति के पद पर रहे किंतु आज के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास जग भर में बड़ी विपत्ति ढा रहा है उनकी कई योजनाएं तो ऐसी भी है जैसे किसी कल्पना से भरे महान सपने को झटके में पूरा करना हो। किंतु ऐसे आत्मविश्वास के साथ कई बार वे सफल भी हो जाते हैं वेनेजुएला के राष्ट्रपति को वह सफल अभियान कर अमेरिका ले आए और यह सैन्य अभियान था रातों-रात यह सब हुआ और वेनेजुएला अपनी शक्ति का उपयोग भी नहीं कर सका वह अमेरिका की रणनीतिक जीत रही। किंतु अमेरिका की टैरिफ नीति और अब ईरान को लेकर जो सीधी कार्यवाही का मिजाज रहा है, यह दुनिया में अमेरिका की मन:स्थिति को लेकर भय पैदा करता है।
किंतु बात यह है कि नेतृत्वकर्ता अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप है और केवल यही बात अमेरिका को एक नया रूप धारण करवा देती है वे ट्रंप मात्रा नहीं है उनका नाम संभावित विश्व विजई डोनाल्ड ट्रंप होना बाकी है। वह विजय रथ पर हैं दुनिया को जीतकर हुए अमेरिका को एक बार फिर महान बनाने को आए हैं वह सिकंदर द्वितीय है वे उसी सिकंदर के सपनों के साथ जन्मे हैं जो विश्व विजय के रथ पर सवार था वह काफी हद तक सफल भी रहा। अब यह डोनाल्ड ट्रंप का समय है विश्व पर धाक जमाने का।
किंतु इस बार यह सब इतना आसान नहीं फिर भी सिकंदर के स्वप्न वाले डोनाल्ड ट्रंप रुकने वाले क्यों है ईरान के साथ भीषण संघर्ष के बाद अब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में जब शांति वार्ता हुई तो वह विफल हो गयी अब अमेरिका का सबसे बड़ा प्रशंसक राष्ट्र पाकिस्तान ईरान को मनाने के लिए तेहरान पहुंच चुका है। असीम मुनीर नेतृत्व कर रहे हैं दुनिया की नजर टिकी है उधर अमेरिका का स्टेटमेंट आता है कि अगर ईरान इस बात को नहीं मानता समझौते को स्वीकार नहीं करता तो उनकी सेना तैयार है युद्ध फिर से शुरू रहेगा।
अब ऐसा कहना आवश्यक भी है भला सिकंदर के सपनों वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को क्यों नहीं ऐसा कहना चाहिए अमेरिका उनके नेतृत्व में अपनी महानता को पून:स्थापित करने वाला है। अमेरिका विश्व का बॉस है और नीति अमेरिकी फर्स्ट की है यह सब डोनाल्ड ट्रंप की प्राथमिकताएं हैं उसमें यदि कोई अमेरिका की डील स्वीकार नहीं करेगा उसे गंभीर परिणाम झेलने होंगे किंतु समस्या की बात यह है की इस सब में अमेरिका अंतिम रूप से कूटनीतिक दृष्टि से विफल साबित हो रहा है और रही बात विश्व विजई डोनाल्ड ट्रंप बनने की इस युग में वह युद्ध अभियान को छेड़ कर संभव है यह कल्पना मात्र है कूटनीति ही इस युग में आपको सर्वोत्तम स्थिति दे सकती है आपको वही मार्ग अपनाना होगा संवाद का।।

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